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mahabharat 1.34.11: इन्द्र बोले - पक्षीराज! आपने जो कुछ कहा है, उससे मैं बहुत संतुष्ट हूँ। पक्षीश्रेष्ठ! आप मुझसे जो चाहें वर माँग लें। 11.   |   mahabharat अध्याय 1.34: इन्द्र और गरुडकी मित्रता, गरुडका अमृत लेकर नागोंके पास आना और विनताको दासीभावसे छुड़ाना तथा इन्द्रद्वारा अमृतका अपहरण   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 34: इन्द्र और गरुडकी मित्रता, गरुडका अमृत लेकर नागोंके पास आना और विनताको दासीभावसे छुड़ाना तथा इन्द्रद्वारा अमृतका अपहरण  »  श्लोक 11
 
 
श्लोक  1.34.11 
शक्र उवाच
वाक्येनानेन तुष्टो ऽ हं यत् त्वयोक्तमिहाण्डज।
यमिच्छसि वरं मत्तस्तं गृहाण खगोत्तम॥ ११॥
 
 
अनुवाद
इन्द्र बोले - पक्षीराज! आपने जो कुछ कहा है, उससे मैं बहुत संतुष्ट हूँ। पक्षीश्रेष्ठ! आप मुझसे जो चाहें वर माँग लें। 11.
 
Indra said - King of birds! I am very satisfied with what you have said here. Best of birds! Ask for any boon you want from me. 11.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)