Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 1.33.25: इन्द्र बोले - हे पक्षीश्रेष्ठ! मैं आपके उत्तम एवं उत्कृष्ट बल को जानना चाहता हूँ तथा आपके साथ ऐसी मैत्री स्थापित करना चाहता हूँ जो कभी समाप्त न हो। | mahabharat अध्याय 1.33: गरुडका अमृत लेकर लौटना, मार्गमें भगवान् विष्णुसे वर पाना एवं उनपर इन्द्रके द्वारा वज्र-प्रहार । mahabharat पर्व 1: आदि पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
इन्द्र बोले - हे पक्षीश्रेष्ठ! मैं आपके उत्तम एवं उत्कृष्ट बल को जानना चाहता हूँ तथा आपके साथ ऐसी मैत्री स्थापित करना चाहता हूँ जो कभी समाप्त न हो।
Indra said - O great bird! I want to know your best and excellent strength and want to establish such a friendship with you that will never end. 25.
इति श्रीमहाभारते आदिपर्वणि आस्तीकपर्वणि सौपर्णे त्रय त्रिंशोऽध्याय:॥ ३३॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत आदिपर्वके अन्तर्गत आस्तीकपर्वमें गरुडचरित्रविषयक तैंतीसवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ ३३॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥