श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 33: गरुडका अमृत लेकर लौटना, मार्गमें भगवान् विष्णुसे वर पाना एवं उनपर इन्द्रके द्वारा वज्र-प्रहार  »  श्लोक 22
 
 
श्लोक  1.33.22 
न च वज्रनिपातेन रुजा मेऽस्तीह काचन।
एवमुक्त्वा तत: पत्रमुत्ससर्ज स पक्षिराट्॥ २२॥
 
 
अनुवाद
‘आपके वज्र के प्रहार से मेरे शरीर में कोई पीड़ा नहीं हो रही है।’ ऐसा कहकर पक्षीराज ने अपना एक पंख गिरा दिया।
 
'There is no pain in my body due to your thunderbolt's strike.' Saying so, the king of birds dropped one of his feathers.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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