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mahabharat 1.33.12: उस समय विनतानंदन गरुड़ की आकाश में भगवान विष्णु से भेंट हुई। भगवान नारायण गरुड़ की लोभरहित वीरता देखकर अत्यंत प्रसन्न हुए। 12.   |   mahabharat अध्याय 1.33: गरुडका अमृत लेकर लौटना, मार्गमें भगवान् विष्णुसे वर पाना एवं उनपर इन्द्रके द्वारा वज्र-प्रहार   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 33: गरुडका अमृत लेकर लौटना, मार्गमें भगवान् विष्णुसे वर पाना एवं उनपर इन्द्रके द्वारा वज्र-प्रहार  »  श्लोक 12
 
 
श्लोक  1.33.12 
विष्णुना च तदाकाशे वैनतेय: समेयिवान्।
तस्य नारायणस्तुष्टस्तेनालौल्येन कर्मणा॥ १२॥
 
 
अनुवाद
उस समय विनतानंदन गरुड़ की आकाश में भगवान विष्णु से भेंट हुई। भगवान नारायण गरुड़ की लोभरहित वीरता देखकर अत्यंत प्रसन्न हुए। 12.
 
At that time, Vinatanandan Garuda met Lord Vishnu in the sky. Lord Narayana was very pleased with Garuda's bravery without greed. 12.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)