श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 33: गरुडका अमृत लेकर लौटना, मार्गमें भगवान् विष्णुसे वर पाना एवं उनपर इन्द्रके द्वारा वज्र-प्रहार  »  श्लोक 11
 
 
श्लोक  1.33.11 
अपीत्वैवामृतं पक्षी परिगृह्याशु नि:सृत:।
आगच्छदपरिश्रान्त आवार्यार्कप्रभां तत:॥ ११॥
 
 
अनुवाद
उन्होंने स्वयं अमृत नहीं पिया; केवल उसे लेकर सूर्य की किरणों की परवाह न करते हुए वहाँ से शीघ्रता से चले गए और बिना थके ही वापस आ गए ॥11॥
 
He himself did not drink the nectar; he only took it and hurried away from there, disregarding the rays of the Sun and came back without getting tired. ॥ 11॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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