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mahabharat 1.32.8: तब सहस्र नेत्रों वाले इन्द्रदेव ने तुरन्त वायु को आदेश दिया - 'मारुति! तुम इस धूल की वर्षा को हटा दो; क्योंकि यह कार्य तुम्हारे ही अधिकार में है।' ॥8॥   |   mahabharat अध्याय 1.32: गरुडका देवताओंके साथ युद्ध और देवताओंकी पराजय   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 32: गरुडका देवताओंके साथ युद्ध और देवताओंकी पराजय  »  श्लोक 8
 
 
श्लोक  1.32.8 
ततो देव: सहस्राक्षस्तूर्णं वायुमचोदयत्।
विक्षिपेमां रजोवृष्टिं तवेदं कर्म मारुत॥ ८॥
 
 
अनुवाद
तब सहस्र नेत्रों वाले इन्द्रदेव ने तुरन्त वायु को आदेश दिया - 'मारुति! तुम इस धूल की वर्षा को हटा दो; क्योंकि यह कार्य तुम्हारे ही अधिकार में है।' ॥8॥
 
Then the thousand-eyed Indradev immediately ordered the wind - 'Maaruta! You remove this rain of dust; because this work is in your power only.' ॥ 8॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)