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mahabharat 1.32.23: वह आग पूरे आकाश को अपनी लपटों से ढक रही थी। उसमें से बहुत ऊँची लपटें उठ रही थीं। वह सूर्य की तरह जल रही थी और तेज़ हवा के झोंके से और भी भड़क रही थी।   |   mahabharat अध्याय 1.32: गरुडका देवताओंके साथ युद्ध और देवताओंकी पराजय   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 32: गरुडका देवताओंके साथ युद्ध और देवताओंकी पराजय  »  श्लोक 23
 
 
श्लोक  1.32.23 
आवृण्वानं महाज्वालमर्चिर्भि: सर्वतोऽम्बरम्।
दहन्तमिव तीक्ष्णांशुं चण्डवायुसमीरितम्॥ २३॥
 
 
अनुवाद
वह आग पूरे आकाश को अपनी लपटों से ढक रही थी। उसमें से बहुत ऊँची लपटें उठ रही थीं। वह सूर्य की तरह जल रही थी और तेज़ हवा के झोंके से और भी भड़क रही थी।
 
That fire was covering the entire sky with its flames. Very high flames were rising from it. It was burning like the sun and was blazing more and more being driven by the strong wind.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)