Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 1.32.14: फिर भी पक्षीराज गरुड़ देवताओं के साथ घोर युद्ध करते हुए तनिक भी विचलित नहीं हुए। परम प्रतापी विनतानन्दन गरुड़ ने क्रोध में भरकर मानो देवताओं को भस्म कर देंगे, आकाश में खड़े होकर अपने पंख और वक्ष को प्रचण्ड वेग से चारों ओर से धकेलकर उन सबको मार डाला॥14॥ | mahabharat अध्याय 1.32: गरुडका देवताओंके साथ युद्ध और देवताओंकी पराजय । mahabharat पर्व 1: आदि पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
फिर भी पक्षीराज गरुड़ देवताओं के साथ घोर युद्ध करते हुए तनिक भी विचलित नहीं हुए। परम प्रतापी विनतानन्दन गरुड़ ने क्रोध में भरकर मानो देवताओं को भस्म कर देंगे, आकाश में खड़े होकर अपने पंख और वक्ष को प्रचण्ड वेग से चारों ओर से धकेलकर उन सबको मार डाला॥14॥
Even then the bird king Garuda did not get fazed even a bit while fighting a fierce battle with the gods. The most majestic Vinatanandan Garuda, filled with rage as if he would burn the gods to ashes, standing in the sky, killed them all on all sides by pushing his wings and chest.॥ 14॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥