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श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 32: गरुडका देवताओंके साथ युद्ध और देवताओंकी पराजय  »  श्लोक 13
 
 
श्लोक  1.32.13 
क्षुरप्रैर्ज्वलितैश्चापि चक्रैरादित्यरूपिभि:।
नानाशस्त्रविसर्गैस्तैर्वध्यमान: समन्तत:॥ १३॥
 
 
अनुवाद
वह चारों ओर से अग्नि के समान प्रज्वलित भालों, सूर्य के समान चमकते चक्रों तथा अन्य अनेक प्रकार के अस्त्र-शस्त्रों से आक्रमण कर रहा था।
 
He was being attacked from all sides by lances blazing like fire, discus shining like the sun, and various other kinds of weapons.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)