श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 31: इन्द्रके द्वारा वालखिल्योंका अपमान और उनकी तपस्याके प्रभावसे अरुण एवं गरुडकी उत्पत्ति  »  श्लोक 9
 
 
श्लोक  1.31.9 
प्रलीनान् स्वेष्विवाङ्गेषु निराहारांस्तपोधनान्।
क्लिश्यमानान् मन्दबलान् गोष्पदे सम्प्लुतोदके॥ ९॥
 
 
अनुवाद
उन्होंने अन्न त्याग दिया था। तपस्या ही उनका एकमात्र धन था। वे अपने शरीर में ही खोए हुए प्रतीत होते थे। जल से भरे गड्ढे को पार करने में भी उन्हें बड़ी कठिनाई होती थी। उनकी शारीरिक शक्ति बहुत कम थी॥9॥
 
He had given up food. Penance was his only wealth. He seemed to be lost in his own body. He had a great difficulty even in crossing a ditch filled with water. He had very little physical strength.॥9॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)