श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 31: इन्द्रके द्वारा वालखिल्योंका अपमान और उनकी तपस्याके प्रभावसे अरुण एवं गरुडकी उत्पत्ति  »  श्लोक 7
 
 
श्लोक  1.31.7 
शक्रस्तु वीर्यसदृशमिध्मभारं गिरिप्रभम्।
समुद्यम्यानयामास नातिकृच्छ्रादिव प्रभु:॥ ७॥
 
 
अनुवाद
इन्द्र बहुत शक्तिशाली थे। अपनी शक्ति के अनुसार उन्होंने लकड़ी का पहाड़ जैसा भार उठाकर बिना किसी परेशानी के वापस ले आए। 7.
 
Indra was powerful. According to his strength he lifted a mountain-like load of wood and brought it back without any trouble. 7.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)