श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 31: इन्द्रके द्वारा वालखिल्योंका अपमान और उनकी तपस्याके प्रभावसे अरुण एवं गरुडकी उत्पत्ति  »  श्लोक 4
 
 
श्लोक  1.31.4 
सौतिरुवाच
विषयोऽयं पुराणस्य यन्मां त्वं परिपृच्छसि।
शृणु मे वदत: सर्वमेतत् संक्षेपतो द्विज॥ ४॥
 
 
अनुवाद
उग्रश्रवाजी बोले - हे ब्रह्मन्! आप मुझसे जो पूछ रहे हैं, वह पुराणों का विषय है। मैं यह सब बातें संक्षेप में आपसे कह रहा हूँ, कृपया सुनें।
 
Ugrashravaji said - O Brahman! What you are asking me is a subject of the Puranas. I am telling you all these things in brief, please listen.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)