पतत्त्रीणां च गरुडमिन्द्रत्वेनाभ्यषिञ्चत।
तस्यैतत् कर्म सुमहच्छ्रूयतां भृगुनन्दन॥ ३५॥
अनुवाद
हे भृगुपुत्र! दूसरे पुत्र गरुड़ को पक्षियों का इन्द्र पद प्राप्त हुआ। अब गरुड़ का यह महान पराक्रम सुनो।
O son of Bhrigu! The second son Garuda was anointed as the Indra of the birds. Now listen to this great feat of Garuda.
इति श्रीमहाभारते आदिपर्वणि आस्तीकपर्वणि सौपर्णे एकत्रिंशोऽध्याय:॥ ३१॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत आदिपर्वके अन्तर्गत आस्तीकपर्वमें गरुडचरित्रविषयक इकतीसवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ ३१॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥