श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 31: इन्द्रके द्वारा वालखिल्योंका अपमान और उनकी तपस्याके प्रभावसे अरुण एवं गरुडकी उत्पत्ति  »  श्लोक 35
 
 
श्लोक  1.31.35 
पतत्त्रीणां च गरुडमिन्द्रत्वेनाभ्यषिञ्चत।
तस्यैतत् कर्म सुमहच्छ्रूयतां भृगुनन्दन॥ ३५॥
 
 
अनुवाद
हे भृगुपुत्र! दूसरे पुत्र गरुड़ को पक्षियों का इन्द्र पद प्राप्त हुआ। अब गरुड़ का यह महान पराक्रम सुनो।
 
O son of Bhrigu! The second son Garuda was anointed as the Indra of the birds. Now listen to this great feat of Garuda.
 
इति श्रीमहाभारते आदिपर्वणि आस्तीकपर्वणि सौपर्णे एकत्रिंशोऽध्याय:॥ ३१॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत आदिपर्वके अन्तर्गत आस्तीकपर्वमें गरुडचरित्रविषयक इकतीसवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ ३१॥

 
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)