श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 31: इन्द्रके द्वारा वालखिल्योंका अपमान और उनकी तपस्याके प्रभावसे अरुण एवं गरुडकी उत्पत्ति  »  श्लोक 34
 
 
श्लोक  1.31.34 
जनयामास पुत्रौ द्वावरुणं गरुडं तथा।
विकलाङ्गोऽरुणस्तत्र भास्करस्य पुर:सर:॥ ३४॥
 
 
अनुवाद
उन्होंने दो पुत्र उत्पन्न किए - अरुण और गरुड़। जिसके अंग अधूरे रह गए, उसे अरुण कहते हैं। वह सूर्यदेव का सारथी बनकर उनके आगे-आगे चलता है।
 
He produced two sons- Arun and Garuda. The one whose limbs were left incomplete is called Arun. He becomes the charioteer of the Sun God and goes ahead of him.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)