Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 1.31.32: एक बात ध्यान में रखना - आज से फिर कभी अभिमान के कारण ब्रह्मवादी महापुरुषों का उपहास या अपमान मत करना, क्योंकि उनके पास वाणी रूपी अमोघ वज्र है और वे अत्यंत क्रोधी हैं।॥32॥   |   mahabharat अध्याय 1.31: इन्द्रके द्वारा वालखिल्योंका अपमान और उनकी तपस्याके प्रभावसे अरुण एवं गरुडकी उत्पत्ति   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 31: इन्द्रके द्वारा वालखिल्योंका अपमान और उनकी तपस्याके प्रभावसे अरुण एवं गरुडकी उत्पत्ति  »  श्लोक 32
 
 
श्लोक  1.31.32 
न चाप्येवं त्वया भूय: क्षेप्तव्या ब्रह्मवादिन:।
न चावमान्या दर्पात् ते वाग्वज्रा भृशकोपना:॥ ३२॥
 
 
अनुवाद
एक बात ध्यान में रखना - आज से फिर कभी अभिमान के कारण ब्रह्मवादी महापुरुषों का उपहास या अपमान मत करना, क्योंकि उनके पास वाणी रूपी अमोघ वज्र है और वे अत्यंत क्रोधी हैं।॥32॥
 
‘Keep one thing in mind - from today onwards, never again out of pride, mock or insult the great men who are Brahmavadis, because they have an infallible thunderbolt in the form of speech and they are extremely short-tempered.'॥ 32॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)