श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 31: इन्द्रके द्वारा वालखिल्योंका अपमान और उनकी तपस्याके प्रभावसे अरुण एवं गरुडकी उत्पत्ति  »  श्लोक 28
 
 
श्लोक  1.31.28 
उवाच चैनां भगवान् कश्यप: पुनरेव ह।
धार्यतामप्रमादेन गर्भोऽयं सुमहोदय:॥ २८॥
 
 
अनुवाद
ऐसा कहकर भगवान कश्यप ने पुनः विनता से कहा - 'देवी! यह गर्भ अत्यंत प्रकाशवान होगा, अतः इसे सावधानी से धारण करो ॥28॥
 
Having said this, Lord Kashyapa again said to Vinata - 'Devi! This womb will be very enlightening, hence wear it carefully. 28॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)