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mahabharat 1.31.21: महर्षि कश्यप की यह बात सुनकर तपस्वी वालखिल्य मुनि ने महामुनि प्रजापति को प्रणाम करके कहा॥21॥   |   mahabharat अध्याय 1.31: इन्द्रके द्वारा वालखिल्योंका अपमान और उनकी तपस्याके प्रभावसे अरुण एवं गरुडकी उत्पत्ति   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 31: इन्द्रके द्वारा वालखिल्योंका अपमान और उनकी तपस्याके प्रभावसे अरुण एवं गरुडकी उत्पत्ति  »  श्लोक 21
 
 
श्लोक  1.31.21 
एवमुक्ता: कश्यपेन वाल ख ल्यास्तपोधना:।
प्रत्यूचुरभिसम्पूज्य मुनिश्रेष्ठं प्रजापतिम्॥ २१॥
 
 
अनुवाद
महर्षि कश्यप की यह बात सुनकर तपस्वी वालखिल्य मुनि ने महामुनि प्रजापति को प्रणाम करके कहा॥21॥
 
On hearing this from Maharishi Kashyap, Valakhilya Muni, who was rich in penance, saluted the great sage Prajapati and said. 21॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)