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श्री महाभारत
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पर्व 1: आदि पर्व
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अध्याय 31: इन्द्रके द्वारा वालखिल्योंका अपमान और उनकी तपस्याके प्रभावसे अरुण एवं गरुडकी उत्पत्ति
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श्लोक 2
श्लोक
1.31.2
कश्यपस्य द्विजातेश्च कथं वै पक्षिराट् सुत:।
अधृष्य: सर्वभूतानामवध्यश्चाभवत् कथम्॥ २॥
अनुवाद
कश्यपजी तो ब्राह्मण हैं, फिर उनका पुत्र पक्षियों का राजा कैसे हो गया? और वह समस्त प्राणियों के लिए भयंकर और अविनाशी कैसे हो गया?॥2॥
Kashyapji is a Brahmin, how did his son become the king of birds? Also, how did he become fierce and indestructible for all creatures?॥ 2॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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