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mahabharat 1.31.18: 'तपोधनो! ​​ब्रह्माजी की आज्ञा से ये पुरन्दर तीनों लोकों के इन्द्र बनाये गये हैं और तुम लोग भी दूसरे इन्द्र की उत्पत्ति के लिए प्रयत्न कर रहे हो॥18॥   |   mahabharat अध्याय 1.31: इन्द्रके द्वारा वालखिल्योंका अपमान और उनकी तपस्याके प्रभावसे अरुण एवं गरुडकी उत्पत्ति   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 31: इन्द्रके द्वारा वालखिल्योंका अपमान और उनकी तपस्याके प्रभावसे अरुण एवं गरुडकी उत्पत्ति  »  श्लोक 18
 
 
श्लोक  1.31.18 
अयमिन्द्रस्त्रिभुवने नियोगाद् ब्रह्मण: कृत:।
इन्द्रार्थे च भवन्तोऽपि यत्नवन्तस्तपोधना:॥ १८॥
 
 
अनुवाद
'तपोधनो! ​​ब्रह्माजी की आज्ञा से ये पुरन्दर तीनों लोकों के इन्द्र बनाये गये हैं और तुम लोग भी दूसरे इन्द्र की उत्पत्ति के लिए प्रयत्न कर रहे हो॥18॥
 
'Tapodhono! By the order of Brahmaji, these Purandars have been made the Indras of the three worlds and you people are also trying for the birth of another Indra. 18॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)