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mahabharat 1.31.17: सत्यवादी महर्षि वालखिल्यो ने कहा, 'हाँ, ऐसी ही बात है' और अपने कर्मों की सफलता बताई। तब प्रजापति कश्यप ने उन्हें सान्त्वना देते हुए कहा -॥17॥   |   mahabharat अध्याय 1.31: इन्द्रके द्वारा वालखिल्योंका अपमान और उनकी तपस्याके प्रभावसे अरुण एवं गरुडकी उत्पत्ति   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 31: इन्द्रके द्वारा वालखिल्योंका अपमान और उनकी तपस्याके प्रभावसे अरुण एवं गरुडकी उत्पत्ति  »  श्लोक 17
 
 
श्लोक  1.31.17 
एवमस्त्विति तं चापि प्रत्यूचु: सत्यवादिन:।
तान् कश्यप उवाचेदं सान्त्वपूर्वं प्रजापति:॥ १७॥
 
 
अनुवाद
सत्यवादी महर्षि वालखिल्यो ने कहा, 'हाँ, ऐसी ही बात है' और अपने कर्मों की सफलता बताई। तब प्रजापति कश्यप ने उन्हें सान्त्वना देते हुए कहा -॥17॥
 
The truthful Maharishi Valakhilyo said, 'Yes, that is the case' and explained the success of his deeds. Then Prajapati Kashyap consoled him and said -॥ 17॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)