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श्री महाभारत
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पर्व 1: आदि पर्व
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अध्याय 31: इन्द्रके द्वारा वालखिल्योंका अपमान और उनकी तपस्याके प्रभावसे अरुण एवं गरुडकी उत्पत्ति
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श्लोक 16
श्लोक
1.31.16
तच्छ्रुत्वा देवराजस्य कश्यपोऽथ प्रजापति:।
वालखिल्यानुपागम्य कर्मसिद्धिमपृच्छत॥ १६॥
अनुवाद
देवराज इन्द्र से उनका निश्चय सुनकर प्रजापति कश्यप वाल्खिल्यस के पास गए और उनसे उस कर्म की सिद्धि के विषय में प्रश्न पूछा ॥16॥
Hearing his resolution from Devraj Indra, Prajapati Kashyap went to Valkhilyas and asked him questions regarding the accomplishment of that deed. 16॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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