Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 1.31.13: उन श्रेष्ठ व्रतों का संयमपूर्वक पालन करने वाले महर्षियों ने यह निश्चय किया कि - 'समस्त देवताओं के लिए एक और इन्द्र उत्पन्न होना चाहिए, जो वर्तमान देवताओं के राजा के लिए भय उत्पन्न करने वाला हो, जो इच्छानुसार कार्य करने में समर्थ हो तथा जिसमें अपनी इच्छानुसार कार्य करने की शक्ति हो॥ 13॥ | mahabharat अध्याय 1.31: इन्द्रके द्वारा वालखिल्योंका अपमान और उनकी तपस्याके प्रभावसे अरुण एवं गरुडकी उत्पत्ति । mahabharat पर्व 1: आदि पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
उन श्रेष्ठ व्रतों का संयमपूर्वक पालन करने वाले महर्षियों ने यह निश्चय किया कि - 'समस्त देवताओं के लिए एक और इन्द्र उत्पन्न होना चाहिए, जो वर्तमान देवताओं के राजा के लिए भय उत्पन्न करने वाला हो, जो इच्छानुसार कार्य करने में समर्थ हो तथा जिसमें अपनी इच्छानुसार कार्य करने की शक्ति हो॥ 13॥
Those great sages, who followed the best vows with self-control, resolved that - 'For all the gods, another Indra should be born, who should be fearsome for the current King of the Gods, who should be able to perform feats as per his wish and who should have the power to act according to his own liking.॥ 13॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥