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mahabharat 1.31.11: इंद्र के इस व्यवहार से वाल्खिल्य ऋषि क्रोधित हो गए। उनके हृदय में तीव्र क्रोध उत्पन्न हो गया। अतः उन्होंने उस समय ऐसा महान अनुष्ठान आरम्भ किया, जिसके परिणाम इंद्र के लिए भयंकर थे। 11.   |   mahabharat अध्याय 1.31: इन्द्रके द्वारा वालखिल्योंका अपमान और उनकी तपस्याके प्रभावसे अरुण एवं गरुडकी उत्पत्ति   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 31: इन्द्रके द्वारा वालखिल्योंका अपमान और उनकी तपस्याके प्रभावसे अरुण एवं गरुडकी उत्पत्ति  »  श्लोक 11
 
 
श्लोक  1.31.11 
तेऽथ रोषसमाविष्टा: सुभृशं जातमन्यव:।
आरेभिरे महत् कर्म तदा शक्रभयंकरम्॥ ११॥
 
 
अनुवाद
इंद्र के इस व्यवहार से वाल्खिल्य ऋषि क्रोधित हो गए। उनके हृदय में तीव्र क्रोध उत्पन्न हो गया। अतः उन्होंने उस समय ऐसा महान अनुष्ठान आरम्भ किया, जिसके परिणाम इंद्र के लिए भयंकर थे। 11.
 
This behaviour of Indra infuriated the Valakhilya sages. A great deal of anger rose in their hearts. So, at that time they started such a great ritual, the consequences of which were terrible for Indra. 11.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)