Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 1.30.51: उनका बल, पराक्रम और तेज अद्वितीय था, वे दैत्यों के नगरों को नष्ट करने में समर्थ थे और अग्नि के समान तेजस्वी शरीर से प्रकाशित थे; उन्होंने अमृत की रक्षा करने का मन में दृढ़ निश्चय कर लिया था ॥51॥ | mahabharat अध्याय 1.30: गरुडका कश्यपजीसे मिलना, उनकी प्रार्थनासे वालखिल्य ऋषियोंका शाखा छोड़कर तपके लिये प्रस्थान और गरुडका निर्जन पर्वतपर उस शाखाको छोड़ना । mahabharat पर्व 1: आदि पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
उनका बल, पराक्रम और तेज अद्वितीय था, वे दैत्यों के नगरों को नष्ट करने में समर्थ थे और अग्नि के समान तेजस्वी शरीर से प्रकाशित थे; उन्होंने अमृत की रक्षा करने का मन में दृढ़ निश्चय कर लिया था ॥51॥
His strength, valour and brilliance were unmatched, capable of destroying the cities of the demons and shining with a body radiant like fire; he had firmly resolved in his mind to protect the nectar. ॥ 51॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥