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श्लोक 1.30.46  |
धारयन्तो विचित्राणि काञ्चनानि मनस्विन:।
कवचानि महार्हाणि वैदूर्यविकृतानि च॥ ४६॥ |
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| अनुवाद |
| मनस्वी देवता विचित्र स्वर्णमय एवं बहुमूल्य वैदूर्यमणि के समान कवच धारण करने लगे ॥46॥ |
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| Manasvi deity started wearing strange golden and precious Vaidurya gem-like armour. 46॥ |
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