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mahabharat 1.30.32: उस समय देवताओं में भयंकर उत्पात मचने लगे। देवराज इन्द्र का प्रिय अस्त्र वज्र भय के कारण आग की तरह जलने लगा।   |   mahabharat अध्याय 1.30: गरुडका कश्यपजीसे मिलना, उनकी प्रार्थनासे वालखिल्य ऋषियोंका शाखा छोड़कर तपके लिये प्रस्थान और गरुडका निर्जन पर्वतपर उस शाखाको छोड़ना   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 30: गरुडका कश्यपजीसे मिलना, उनकी प्रार्थनासे वालखिल्य ऋषियोंका शाखा छोड़कर तपके लिये प्रस्थान और गरुडका निर्जन पर्वतपर उस शाखाको छोड़ना  »  श्लोक 32
 
 
श्लोक  1.30.32 
प्रावर्तन्ताथ देवानामुत्पाता भयशंसिन:।
इन्द्रस्य वज्रं दयितं प्रजज्वाल भयात् तत:॥ ३२॥
 
 
अनुवाद
उस समय देवताओं में भयंकर उत्पात मचने लगे। देवराज इन्द्र का प्रिय अस्त्र वज्र भय के कारण आग की तरह जलने लगा।
 
At that time many fearful disturbances began to take place among the gods. The favourite weapon of Devaraj Indra, Vajra, caught fire out of fear.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)