श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 30: गरुडका कश्यपजीसे मिलना, उनकी प्रार्थनासे वालखिल्य ऋषियोंका शाखा छोड़कर तपके लिये प्रस्थान और गरुडका निर्जन पर्वतपर उस शाखाको छोड़ना  »  श्लोक 31
 
 
श्लोक  1.30.31 
तावुभौ भक्षयित्वा तु स तार्क्ष्य: कूर्मकुञ्जरौ।
तत: पर्वतकूटाग्रादुत्पपात महाजव:॥ ३१॥
 
 
अनुवाद
इस प्रकार कछुए और हाथी दोनों को खाकर अत्यन्त वेगवान गरुड़ पर्वत की चोटी से ऊपर की ओर उड़ चले।
 
Having thus eaten both the tortoise and the elephant, the very swift Garuda flew upwards from the peak of the mountain.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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