श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 30: गरुडका कश्यपजीसे मिलना, उनकी प्रार्थनासे वालखिल्य ऋषियोंका शाखा छोड़कर तपके लिये प्रस्थान और गरुडका निर्जन पर्वतपर उस शाखाको छोड़ना  »  श्लोक 29
 
 
श्लोक  1.30.29 
ते हेमविकचा भूमौ युता: पर्वतधातुभि:।
व्यराजञ्छाखिनस्तत्र सूर्यांशुप्रतिरञ्जिता:॥ २९॥
 
 
अनुवाद
पृथ्वी पर गिरते हुए वे सुनहरे फूलों वाले वृक्ष, पर्वतों से निकली गेरू आदि धातुओं के साथ मिलकर, सूर्य की किरणों से रंगे हुए प्रतीत होते थे।
 
Those trees with golden flowers, falling on the earth, got mixed with the metals like ochre etc. from the mountains and looked beautiful as if they were coloured by the rays of the sun.
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by acd