श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 30: गरुडका कश्यपजीसे मिलना, उनकी प्रार्थनासे वालखिल्य ऋषियोंका शाखा छोड़कर तपके लिये प्रस्थान और गरुडका निर्जन पर्वतपर उस शाखाको छोड़ना  »  श्लोक 26
 
 
श्लोक  1.30.26 
पक्षानिलहतश्चास्य प्राकम्पत स शैलराट्।
मुमोच पुष्पवर्षं च समागलितपादप:॥ २६॥
 
 
अनुवाद
उनके पंखों की हवा से पहाड़ हिल गया। उस पर उगे कई पेड़ गिर पड़े और फूलों की वर्षा होने लगी।
 
The mountain was shaken by the wind of their wings. Many trees growing on it fell down and it started raining flowers.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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