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श्लोक 1.30.26  |
पक्षानिलहतश्चास्य प्राकम्पत स शैलराट्।
मुमोच पुष्पवर्षं च समागलितपादप:॥ २६॥ |
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| अनुवाद |
| उनके पंखों की हवा से पहाड़ हिल गया। उस पर उगे कई पेड़ गिर पड़े और फूलों की वर्षा होने लगी। |
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| The mountain was shaken by the wind of their wings. Many trees growing on it fell down and it started raining flowers. |
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