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mahabharat 1.30.25: पिता की आज्ञा पाकर वह क्षण भर में पर्वत पर पहुँचा और उस विशाल शाखा को वहीं छोड़ दिया। गिरते समय उसने बहुत जोर से शब्द किया॥25॥   |   mahabharat अध्याय 1.30: गरुडका कश्यपजीसे मिलना, उनकी प्रार्थनासे वालखिल्य ऋषियोंका शाखा छोड़कर तपके लिये प्रस्थान और गरुडका निर्जन पर्वतपर उस शाखाको छोड़ना   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 30: गरुडका कश्यपजीसे मिलना, उनकी प्रार्थनासे वालखिल्य ऋषियोंका शाखा छोड़कर तपके लिये प्रस्थान और गरुडका निर्जन पर्वतपर उस शाखाको छोड़ना  »  श्लोक 25
 
 
श्लोक  1.30.25 
स तं गत्वा क्षणेनैव पर्वतं वचनात् पितु:।
अमुञ्चन्महतीं शाखां सस्वनं तत्र खेचर:॥ २५॥
 
 
अनुवाद
पिता की आज्ञा पाकर वह क्षण भर में पर्वत पर पहुँचा और उस विशाल शाखा को वहीं छोड़ दिया। गिरते समय उसने बहुत जोर से शब्द किया॥25॥
 
Upon his father's command, he reached the mountain in a moment and left the huge branch there. While falling it made a very loud noise.॥25॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)