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mahabharat 1.30.24: पक्षीराज गरुड़ ने उसे साथ लिया और थोड़ी ही देर में वहाँ से एक लाख योजन दूर चले गये।   |   mahabharat अध्याय 1.30: गरुडका कश्यपजीसे मिलना, उनकी प्रार्थनासे वालखिल्य ऋषियोंका शाखा छोड़कर तपके लिये प्रस्थान और गरुडका निर्जन पर्वतपर उस शाखाको छोड़ना   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 30: गरुडका कश्यपजीसे मिलना, उनकी प्रार्थनासे वालखिल्य ऋषियोंका शाखा छोड़कर तपके लिये प्रस्थान और गरुडका निर्जन पर्वतपर उस शाखाको छोड़ना  »  श्लोक 24
 
 
श्लोक  1.30.24 
स तत: शतसाहस्रं योजनान्तरमागत:।
कालेन नातिमहता गरुड: पतगेश्वर:॥ २४॥
 
 
अनुवाद
पक्षीराज गरुड़ ने उसे साथ लिया और थोड़ी ही देर में वहाँ से एक लाख योजन दूर चले गये।
 
The king of birds, Garuda, took him along and in a short while travelled one lakh yojanas from there. 24.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)