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mahabharat 1.30.19: उनके चले जाने पर, मुख में शाखा के कारण बोलने में कठिनाई महसूस करने वाले विनतनन्दन गरुड़ ने अपने पिता कश्यप से पूछा-॥19॥   |   mahabharat अध्याय 1.30: गरुडका कश्यपजीसे मिलना, उनकी प्रार्थनासे वालखिल्य ऋषियोंका शाखा छोड़कर तपके लिये प्रस्थान और गरुडका निर्जन पर्वतपर उस शाखाको छोड़ना   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 30: गरुडका कश्यपजीसे मिलना, उनकी प्रार्थनासे वालखिल्य ऋषियोंका शाखा छोड़कर तपके लिये प्रस्थान और गरुडका निर्जन पर्वतपर उस शाखाको छोड़ना  »  श्लोक 19
 
 
श्लोक  1.30.19 
ततस्तेष्वपयातेषु पितरं विनतासुत:।
शाखाव्याक्षिप्तवदन: पर्यपृच्छत कश्यपम्॥ १९॥
 
 
अनुवाद
उनके चले जाने पर, मुख में शाखा के कारण बोलने में कठिनाई महसूस करने वाले विनतनन्दन गरुड़ ने अपने पिता कश्यप से पूछा-॥19॥
 
After their departure, Vinatanandana Garuda, who had difficulty speaking due to the branch in his mouth, asked his father Kasyapa -॥ 19॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)