Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 1.30.13: देवता, दानव या राक्षस कोई भी उसे दबा या जीत नहीं सकता था। वह पर्वत शिखरों को भेदने और समुद्र के जल को सोख लेने की शक्ति रखता था॥13॥   |   mahabharat अध्याय 1.30: गरुडका कश्यपजीसे मिलना, उनकी प्रार्थनासे वालखिल्य ऋषियोंका शाखा छोड़कर तपके लिये प्रस्थान और गरुडका निर्जन पर्वतपर उस शाखाको छोड़ना   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 30: गरुडका कश्यपजीसे मिलना, उनकी प्रार्थनासे वालखिल्य ऋषियोंका शाखा छोड़कर तपके लिये प्रस्थान और गरुडका निर्जन पर्वतपर उस शाखाको छोड़ना  »  श्लोक 13
 
 
श्लोक  1.30.13 
अप्रधृष्यमजेयं च देवदानवराक्षसै:।
भेत्तारं गिरिशृङ्गाणां समुद्रजलशोषणम्॥ १३॥
 
 
अनुवाद
देवता, दानव या राक्षस कोई भी उसे दबा या जीत नहीं सकता था। वह पर्वत शिखरों को भेदने और समुद्र के जल को सोख लेने की शक्ति रखता था॥13॥
 
Neither gods, demons nor monsters could suppress or conquer him. He had the power to pierce the mountain peaks and absorb the water of the ocean.॥ 13॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)