Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 1.3.92: अतः आपकी अनुमति से मैं इच्छित गुरु-दक्षिणा देना चाहता हूँ।’ उत्तंक के ऐसा कहने पर उपाध्याय ने कहा - ‘बेटा उत्तंक! तो फिर कुछ दिन और यहीं रहो।’ | mahabharat अध्याय 1.3: जनमेजयको सरमाका शाप, जनमेजयद्वारा सोमश्रवाका पुरोहितके पदपर वरण,आरुणि, उपमन्यु, वेद और उत्तंककी गुरुभक्ति तथा उत्तंकका सर्पयज्ञके लिये जनमेजयको प्रोत्साहन देना । mahabharat पर्व 1: आदि पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
अतः आपकी अनुमति से मैं इच्छित गुरु-दक्षिणा देना चाहता हूँ।’ उत्तंक के ऐसा कहने पर उपाध्याय ने कहा - ‘बेटा उत्तंक! तो फिर कुछ दिन और यहीं रहो।’
Therefore, with your permission, I would like to offer the desired Guru-dakshina.' On Uttank saying this, the Upadhyaya said - 'Son Uttank! Then stay here for a few more days.'
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥