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स तया क्रुद्धया तत्रोक्तोऽयं मे पुत्रो न किंचिदपराध्यति नावेक्षते हवींषि नावलेढि किमर्थमभिहत इति॥ ८॥
अनुवाद
वहाँ क्रोध से भरकर सरमा ने जनमेजय से कहा, 'मेरे इस पुत्र ने तुम्हारा कोई अहित नहीं किया है, इसने न तो हवि की ओर देखा है और न ही उसे चाटा है, फिर तुमने इसे क्यों मारा?'
There, filled with rage, Sarma said to Janamejaya, 'This son of mine has done you no wrong, he has neither looked at the offering nor licked it, then why did you kill him?'
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥