श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 3: जनमेजयको सरमाका शाप, जनमेजयद्वारा सोमश्रवाका पुरोहितके पदपर वरण,आरुणि, उपमन्यु, वेद और उत्तंककी गुरुभक्ति तथा उत्तंकका सर्पयज्ञके लिये जनमेजयको प्रोत्साहन देना  »  श्लोक 76
 
 
श्लोक  1.3.76 
आह चैनं यथाश्विनावाहतुस्तथा त्वं श्रेयोऽवाप्स्यसि॥ ७६॥
 
 
अनुवाद
और उन्होंने उससे कहा, 'जैसा अश्विनीकुमारों ने कहा है, उसी प्रकार तुम्हारा कल्याण होगा।
 
And he said to him, 'Just as the Ashwinikumaras have said, in the same way you will be blessed with welfare.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)