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श्री महाभारत
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पर्व 1: आदि पर्व
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अध्याय 3: जनमेजयको सरमाका शाप, जनमेजयद्वारा सोमश्रवाका पुरोहितके पदपर वरण,आरुणि, उपमन्यु, वेद और उत्तंककी गुरुभक्ति तथा उत्तंकका सर्पयज्ञके लिये जनमेजयको प्रोत्साहन देना
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श्लोक 74
श्लोक
1.3.74
स एवमुक्तोऽश्विभ्यां लब्धचक्षुरुपाध्यायसकाशमागम्याभ्यवादयत्॥ ७४॥
अनुवाद
अश्विनों के वचन सुनकर उपमन्यु की दृष्टि लौट आई और वह उपाध्याय के पास आया तथा उन्हें प्रणाम किया।
Upon hearing the words of the Aśvins, Upamanyu regained his sight and came near the Upadhyaya and bowed to him. 74.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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