Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 1.3.73: तब अश्विनीकुमारों ने उनसे कहा, 'हम तुम्हारी गुरुभक्ति से बहुत प्रसन्न हैं । तुम्हारे उपाध्याय के दाँत काले लोहे के समान हैं । तुम्हारे दाँत स्वर्ण के हो जाएँगे । तुम्हारी आँखें भी ठीक हो जाएँगी और तुम्हें सौभाग्य भी प्राप्त होगा ।'॥ 73॥ | mahabharat अध्याय 1.3: जनमेजयको सरमाका शाप, जनमेजयद्वारा सोमश्रवाका पुरोहितके पदपर वरण,आरुणि, उपमन्यु, वेद और उत्तंककी गुरुभक्ति तथा उत्तंकका सर्पयज्ञके लिये जनमेजयको प्रोत्साहन देना । mahabharat पर्व 1: आदि पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
तब अश्विनीकुमारों ने उनसे कहा, 'हम तुम्हारी गुरुभक्ति से बहुत प्रसन्न हैं । तुम्हारे उपाध्याय के दाँत काले लोहे के समान हैं । तुम्हारे दाँत स्वर्ण के हो जाएँगे । तुम्हारी आँखें भी ठीक हो जाएँगी और तुम्हें सौभाग्य भी प्राप्त होगा ।'॥ 73॥
Then Ashwinikumar said to him, 'We are very pleased with your devotion to your Guru. Your Upadhyay's teeth are like black iron. Your teeth will become golden. Your eyes will also be cured and you will also be blessed with good fortune.'॥ 73॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥