श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 3: जनमेजयको सरमाका शाप, जनमेजयद्वारा सोमश्रवाका पुरोहितके पदपर वरण,आरुणि, उपमन्यु, वेद और उत्तंककी गुरुभक्ति तथा उत्तंकका सर्पयज्ञके लिये जनमेजयको प्रोत्साहन देना  »  श्लोक 69
 
 
श्लोक  1.3.69 
इत्येवं तेनाभिष्टुतावश्विनावाजग्मतुराहतुश्चैनं प्रीतौ स्व एष तेऽपूपोऽशानैनमिति॥ ६९॥
 
 
अनुवाद
उपमन्यु की इस प्रकार स्तुति हो जाने पर दोनों अश्विनीकुमार वहाँ आये और उससे बोले - 'उपमन्यु! हम तुमसे बहुत प्रसन्न हैं। यह तुम्हारे खाने के लिए खीर है, इसे खा लो।'
 
After Upmanyu was praised in this manner, both the Ashwini Kumars came there and said to him - 'Upmanyu! We are very pleased with you. This is a pudding for you to eat, eat it.'
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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