Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 1.3.50: इस प्रकार मना किए जाने पर उपमन्यु ने न तो भिक्षा से प्राप्त अन्न खाया, न भिक्षा लेकर आया, न गायों का दूध पिया, न बछड़ों के फेन का उपयोग किया (अब वह भूखा ही रहा)। एक दिन वन में भूख से व्याकुल होकर उसने आक के पत्ते चबाए। 50. | mahabharat अध्याय 1.3: जनमेजयको सरमाका शाप, जनमेजयद्वारा सोमश्रवाका पुरोहितके पदपर वरण,आरुणि, उपमन्यु, वेद और उत्तंककी गुरुभक्ति तथा उत्तंकका सर्पयज्ञके लिये जनमेजयको प्रोत्साहन देना । mahabharat पर्व 1: आदि पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
तथा प्रतिषिद्धो भैक्ष्यं नाश्नाति न चान्यच्चरति पयो न पिबति फेनं नोपयुङ्क्ते। स कदाचिदरण्ये क्षुधार्तोऽर्कपत्राण्यभक्षयत्॥ ५०॥
अनुवाद
इस प्रकार मना किए जाने पर उपमन्यु ने न तो भिक्षा से प्राप्त अन्न खाया, न भिक्षा लेकर आया, न गायों का दूध पिया, न बछड़ों के फेन का उपयोग किया (अब वह भूखा ही रहा)। एक दिन वन में भूख से व्याकुल होकर उसने आक के पत्ते चबाए। 50.
Having been thus forbidden, Upamanyu neither ate the food obtained through alms, nor brought alms again, nor drank the milk of the cows, nor used the foam of the calves (he now remained hungry). One day, being tormented by hunger in the forest, he chewed the leaves of the Aak tree. 50.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥