श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 3: जनमेजयको सरमाका शाप, जनमेजयद्वारा सोमश्रवाका पुरोहितके पदपर वरण,आरुणि, उपमन्यु, वेद और उत्तंककी गुरुभक्ति तथा उत्तंकका सर्पयज्ञके लिये जनमेजयको प्रोत्साहन देना  »  श्लोक 5
 
 
श्लोक  1.3.5 
तं माता प्रत्युवाच व्यक्तं त्वया तत्रापराद्धं येनास्यभिहत इति॥ ५॥
 
 
अनुवाद
तब माँ ने उससे कहा, 'बेटा! तुमने अवश्य ही उनके प्रति कोई अपराध किया होगा, जिसके कारण उन्होंने तुम्हें मार डाला है।'
 
Then the mother said to him, 'Son! You must have committed some crime against them openly, due to which they have killed you.'
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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