श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 3: जनमेजयको सरमाका शाप, जनमेजयद्वारा सोमश्रवाका पुरोहितके पदपर वरण,आरुणि, उपमन्यु, वेद और उत्तंककी गुरुभक्ति तथा उत्तंकका सर्पयज्ञके लिये जनमेजयको प्रोत्साहन देना  »  श्लोक 48
 
 
श्लोक  1.3.48 
स एवमुक्त उपाध्यायं प्रत्युवाच भो: फेनं पिबामि यमिमे वत्सा मातॄणां स्तनात् पिबन्त उद्‍‍गिरन्ति॥ ४८॥
 
 
अनुवाद
यह पूछने पर उन्होंने उपाध्याय से कहा - 'भगवन्! ये बछड़े अपनी माताओं के स्तनों से दूध पीते समय जो झाग उगलते हैं, उसे मैं पीता हूँ।'
 
On being asked this he replied to the Upadhyaya - 'Lord! I drink the foam that these calves spit out while drinking the milk from their mothers' breasts.'
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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