Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 1.3.42: यह सुनकर उपाध्याय बोले - 'यह उचित और उत्तम व्यवहार नहीं है। ऐसा करके तुम अन्य भिखारियों की जीविका में बाधा डाल रहे हो; इसलिए तुम लोभी हो (तुम्हें फिर भिक्षा नहीं लानी चाहिए)॥42॥ | mahabharat अध्याय 1.3: जनमेजयको सरमाका शाप, जनमेजयद्वारा सोमश्रवाका पुरोहितके पदपर वरण,आरुणि, उपमन्यु, वेद और उत्तंककी गुरुभक्ति तथा उत्तंकका सर्पयज्ञके लिये जनमेजयको प्रोत्साहन देना । mahabharat पर्व 1: आदि पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
यह सुनकर उपाध्याय बोले - 'यह उचित और उत्तम व्यवहार नहीं है। ऐसा करके तुम अन्य भिखारियों की जीविका में बाधा डाल रहे हो; इसलिए तुम लोभी हो (तुम्हें फिर भिक्षा नहीं लानी चाहिए)॥42॥
Hearing this, Upadhyaya said, 'This is not a just and noble attitude. By doing this you are obstructing the livelihood of other beggars; hence you are greedy (you should not bring alms again)'॥ 42॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥