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mahabharat 1.3.36: उपाध्याय ने देखा कि उपमन्यु बहुत मोटा और स्वस्थ हो रहा है। तब उन्होंने पूछा, 'बेटा उपमन्यु, तुम अपनी जीविका कैसे चलाते हो, जिससे तुम इतने स्वस्थ और बलवान हो गए हो?'॥36॥   |   mahabharat अध्याय 1.3: जनमेजयको सरमाका शाप, जनमेजयद्वारा सोमश्रवाका पुरोहितके पदपर वरण,आरुणि, उपमन्यु, वेद और उत्तंककी गुरुभक्ति तथा उत्तंकका सर्पयज्ञके लिये जनमेजयको प्रोत्साहन देना   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 3: जनमेजयको सरमाका शाप, जनमेजयद्वारा सोमश्रवाका पुरोहितके पदपर वरण,आरुणि, उपमन्यु, वेद और उत्तंककी गुरुभक्ति तथा उत्तंकका सर्पयज्ञके लिये जनमेजयको प्रोत्साहन देना  »  श्लोक 36
 
 
श्लोक  1.3.36 
तमुपाध्याय: पीवानमपश्यदुवाच चैनं वत्सोपमन्यो केन वृत्तिं कल्पयसि पीवानसि दृढमिति॥ ३६॥
 
 
अनुवाद
उपाध्याय ने देखा कि उपमन्यु बहुत मोटा और स्वस्थ हो रहा है। तब उन्होंने पूछा, 'बेटा उपमन्यु, तुम अपनी जीविका कैसे चलाते हो, जिससे तुम इतने स्वस्थ और बलवान हो गए हो?'॥36॥
 
Upadhyaya saw that Upmanyu was becoming very fat and healthy. Then he asked, 'Son Upmanyu, how do you earn your livelihood, that you have become so healthy and strong?'॥ 36॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)