श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 3: जनमेजयको सरमाका शाप, जनमेजयद्वारा सोमश्रवाका पुरोहितके पदपर वरण,आरुणि, उपमन्यु, वेद और उत्तंककी गुरुभक्ति तथा उत्तंकका सर्पयज्ञके लिये जनमेजयको प्रोत्साहन देना  »  श्लोक 35
 
 
श्लोक  1.3.35 
स उपाध्यायवचनादरक्षद् गा:; स चाहनि गा रक्षित्वा दिवसक्षये गुरुगृहमागम्योपाध्यायस्याग्रत: स्थित्वा नमश्चक्रे॥ ३५॥
 
 
अनुवाद
उपाध्याय की आज्ञा से उपमन्यु गौओं की रक्षा करने लगा। वह दिन भर गौओं की रक्षा करता और शाम को अपने गुरुजी के घर आकर उनके सामने खड़ा होकर उन्हें नमस्कार करता। 35.
 
By the order of Upadhyaya, Upmanyu started protecting the cows. He would protect the cows all day long and in the evening he would come to his Guruji's house and stand in front of him and greet him. 35.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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