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mahabharat 1.3.34: उपाध्याय ने उसे आदेश दिया - 'बेटा उपमन्यु! तुम गौओं की रक्षा करो।'   |   mahabharat अध्याय 1.3: जनमेजयको सरमाका शाप, जनमेजयद्वारा सोमश्रवाका पुरोहितके पदपर वरण,आरुणि, उपमन्यु, वेद और उत्तंककी गुरुभक्ति तथा उत्तंकका सर्पयज्ञके लिये जनमेजयको प्रोत्साहन देना   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 3: जनमेजयको सरमाका शाप, जनमेजयद्वारा सोमश्रवाका पुरोहितके पदपर वरण,आरुणि, उपमन्यु, वेद और उत्तंककी गुरुभक्ति तथा उत्तंकका सर्पयज्ञके लिये जनमेजयको प्रोत्साहन देना  »  श्लोक 34
 
 
श्लोक  1.3.34 
तं चोपाध्याय: प्रेषयामास वत्सोपमन्यो गा रक्षस्वेति॥ ३४॥
 
 
अनुवाद
उपाध्याय ने उसे आदेश दिया - 'बेटा उपमन्यु! तुम गौओं की रक्षा करो।'
 
The Upadhyaya ordered him - 'Son Upmanyu! You protect the cows.'
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)