श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 3: जनमेजयको सरमाका शाप, जनमेजयद्वारा सोमश्रवाका पुरोहितके पदपर वरण,आरुणि, उपमन्यु, वेद और उत्तंककी गुरुभक्ति तथा उत्तंकका सर्पयज्ञके लिये जनमेजयको प्रोत्साहन देना  »  श्लोक 34
 
 
श्लोक  1.3.34 
तं चोपाध्याय: प्रेषयामास वत्सोपमन्यो गा रक्षस्वेति॥ ३४॥
 
 
अनुवाद
उपाध्याय ने उसे आदेश दिया - 'बेटा उपमन्यु! तुम गौओं की रक्षा करो।'
 
The Upadhyaya ordered him - 'Son Upmanyu! You protect the cows.'
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by AmritChaitanyaDas