श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 3: जनमेजयको सरमाका शाप, जनमेजयद्वारा सोमश्रवाका पुरोहितके पदपर वरण,आरुणि, उपमन्यु, वेद और उत्तंककी गुरुभक्ति तथा उत्तंकका सर्पयज्ञके लिये जनमेजयको प्रोत्साहन देना  »  श्लोक 32
 
 
श्लोक  1.3.32 
यस्माच्च त्वया मद्वचनमनुष्ठितं तस्माच्छ्रेयोऽवाप्स्यसि। सर्वे च ते वेदा: प्रतिभास्यन्ति सर्वाणि च धर्मशास्त्राणीति॥ ३२॥
 
 
अनुवाद
उन्होंने यह भी कहा, 'तुमने मेरी आज्ञा का पालन किया है, इसलिए तुम्हारा कल्याण होगा। समस्त वेद और समस्त धर्म-शास्त्र तुम्हारे मन में स्वतः ही प्रकट हो जाएँगे।'॥32॥
 
He also said, 'You have obeyed my command, therefore you will be blessed. All the Vedas and all the religious scriptures will automatically appear before your mind.'॥ 32॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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