Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 1.3.31: आरुणि के ऐसा कहने पर उपाध्याय ने उत्तर दिया, ‘तुम पुष्प-शैल की शिखा को भेदकर उठे हो, अतः उद्धालन के इस कार्य के कारण तुम उद्धालक नाम से प्रसिद्ध होगे।’ ऐसा कहकर उपाध्याय ने आरुणि की स्तुति की। | mahabharat अध्याय 1.3: जनमेजयको सरमाका शाप, जनमेजयद्वारा सोमश्रवाका पुरोहितके पदपर वरण,आरुणि, उपमन्यु, वेद और उत्तंककी गुरुभक्ति तथा उत्तंकका सर्पयज्ञके लिये जनमेजयको प्रोत्साहन देना । mahabharat पर्व 1: आदि पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
आरुणि के ऐसा कहने पर उपाध्याय ने उत्तर दिया, ‘तुम पुष्प-शैल की शिखा को भेदकर उठे हो, अतः उद्धालन के इस कार्य के कारण तुम उद्धालक नाम से प्रसिद्ध होगे।’ ऐसा कहकर उपाध्याय ने आरुणि की स्तुति की।
On Aruni saying this, the Upadhyaya replied, 'You have got up after piercing the ridge of the flowerbed, so due to this act of Uddhalana you will be famous by the name of Uddhalaka.' Saying this, the Upadhyaya obliged Aruni.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥