श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 3: जनमेजयको सरमाका शाप, जनमेजयद्वारा सोमश्रवाका पुरोहितके पदपर वरण,आरुणि, उपमन्यु, वेद और उत्तंककी गुरुभक्ति तथा उत्तंकका सर्पयज्ञके लिये जनमेजयको प्रोत्साहन देना  »  श्लोक 30
 
 
श्लोक  1.3.30 
तदभिवादये भगवन्तमाज्ञापयतु भवान् कमर्थं करवाणीति॥ ३०॥
 
 
अनुवाद
'मैं आपके चरणों में प्रणाम करता हूँ, कृपा करके मुझे बताइये, मैं क्या कार्य करूँ?'॥30॥
 
'I bow at your feet, please tell me, what work should I do?'॥ 30॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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